टीकमगढ़। भगवान महावीर बाल संस्कार स्कूल में रविवार को आयोजित वर्णी जयंती महोत्सव बड़े श्रद्धा और उल्लास के साथ संपन्न हुआ। सुबह नित्य पूजा एवं अभिषेक से प्रारंभ हुए इस आयोजन में बड़ी संख्या में समाजजन शामिल हुए। इसके उपरांत मुनिश्री के मंगल प्रवचन हुए जिनमें उन्होंने जीवन में संयम सेवा और सहअस्तित्व को अपनाने को ही सच्ची साधना बताया। प्रवचन के पश्चात मुनिश्री के सानिध्य में भव्य महा मस्तिकाभिषेक का आयोजन हुआ जो लगभग दोपहर 1 बजकर 30 मिनट तक चलता रहा।
पूरे दिन गूंजा आध्यात्मिक वातावरण
दोपहर 1 बजकर 30 मिनट से शुरू हुए द्वितीय सत्र में विद्यालय परिसर भक्ति और आध्यात्मिकता से सराबोर हो गया। भजन स्तुति और प्रवचनों से वातावरण मंगलमय बना रहा और देर शाम तक समाजजन आध्यात्मिक अनुष्ठानों में डूबे रहे।
समाजसेवियों का हुआ सम्मान
इस अवसर पर समाज में उल्लेखनीय योगदान देने वाले आठ ग्रुपों और समाजसेवियों को मंच से सम्मानित किया गया। समिति पदाधिकारियों ने मुनिश्री को शाल श्रीफल और प्रशस्ति पत्र भेंट कर आशीर्वाद लिया।
शिक्षा और संस्कारों का संदेश
विद्यालय के महामंत्री मनोज मड़वैया ने कहा कि वर्णी जयंती केवल एक उत्सव नहीं बल्कि यह हमें हमारे मूल संस्कारों और परंपराओं की याद दिलाने का अवसर है। ऐसे आयोजन बच्चों को धर्म संस्कृति और सेवा की शिक्षा प्रदान करते हैं। उन्होंने जानकारी दी कि महावीर बाल संस्कार स्कूल प्ले से बारहवीं तक संचालित है जहां एमपी और सीबीएसई बोर्ड में लगभग 1100 छात्र अध्ययनरत हैं। इसके साथ ही पूर्व दिशा में संचालित फार्मेसी कॉलेज छात्रों को रोजगारपरक शिक्षा देकर मेडिकल क्षेत्र में स्वावलंबन की राह दिखा रहा है।
विद्यालय के उपाध्यक्ष धर्मेंद्र जैन ने कहा कि समाज की एकता और संगठन की शक्ति ही सबसे बड़ी ताकत है। वर्णी जयंती जैसे आयोजन संस्कार सहअस्तित्व और सामूहिक विकास का संदेश देते हैं।
कार्यक्रम का समापन शाम को आयोजित वात्सल्य भोज से हुआ। समाज के सभी वर्गों ने इसमें मिलकर सहभागिता की और एकता व सौहार्द का संदेश दिया।
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