0 फातिहा के बाद मजार कमेटी व अन्य लोगों ने वितरित किया तबर्रूख
शुभ न्यूज महोबा। हजरत दानमियां रहममुल्लाह अलैह का सालाना उर्स अकीदमंदों ने धूमधाम से मनाया। मुस्लिम भाईयों ने रविवार की रात करीब साढ़े नौ बजे चादर जुलूस निकाला और मजार ए अकदस पहुंचकर फातिहा के बाद दुआ कर मन्नाते मानी साथ ही अकीदतमंदों ने बुलंद आवाज में सलाम पढा गया। उर्स के मौके पर मौलाना द्वारा मोहम्मद साहब और उनकी सुन्नतों से लोगों को रुबरू कराते हुए उनके बताए गए रास्तों में चलने की उपस्थित लोगों से अपील की गई।
मजार कमेटी द्वारा उर्स की तैयारियों को लेकर पिछले कुछ दिनों से हजरत दानमियां रहममुल्लाह अलैह के अस्ताने परिसर की रंगाई पुताई और परिसर की साफ सफाई कर चमकाया गया साथ ही बिजली की बेहतरीन सजावट कर मजार परिसर को रोशनी में सराबोर किया गया। रविवार को बाद नमाज इशा के मजार का संदल किया गया और चादर जुलूस निकाला गया, जो प्रमुख मार्गों से होता हुआ पुनः मजार ए अकदस पहुंचा, जहां पर मौलाना और हाफिजों द्वारा फातिहा पढ़ी गई, फातिहा मुकम्मल होने के बाद दुआ और मन्नतें मानी गई और इसके बाद अकीदतमंदों ने बुलंद आवाज में सलाम भी पढ़ा। उर्स के मौके पर आए हुए मौलानाओं ने तकरीर करते हुए कहा कि हजरत मोहम्मद साहब सल्लाहु अलैहि वसल्लम इस दुनिया में उस वक्त तशरीफ लाए थे, जब दुनिया में अंधेरा ही अंधेरा था, लेकिन आपने अल्लाह के हुक्म से इस दुनिया को नूर से भर दिया।
तकरीर में मौलाना ने कहा कि औरत, गुलाम, मां बाप, औलाद यहां तक कि जानवरों के अधिकार नबी ने बताए और खुद कमजोरों का सहारा बने, यतीमों के सर पर हाथ रखा और मालदारों को बताया कि गरीबों की मदद करने से अल्लाह खुश होता है। कहा कि एक ऐसे मुल्क में जहां न कोई हुकूमत हो और न कोई कानून, जहां बात बात पर कत्ल करना किसी का खून बहाना मामूली बात हो, ऐसे माहौल में नबी के अखलाक की चकम जाहिर हुई तो न सिर्फ उसने लोगों के दिलों को रोशन किया, बल्कि मोहम्मद साहब की जिंदगी के वाकिआत हर मुल्क हर तबके के लोगों के लिए बेहतरीन नमूना और मिशाल बन गया। उर्स के मौके पीर अली, वाहीद अली (बॉबी), जाविद अली आदि द्वारा लंगर का आयोजन कर लोगों में तबर्रूख का वितरण किया। इस मौके पर अकील, आसू, अरशद सहित तमाम लोग मौजूद रहे।
