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मनुष्य का भौतिक वस्तुएं और संसार का मोह कभी समाप्त नहीं होता : डॉ. अनुरागी



0 संत कबीर आश्रम में आयेजित सत्संग में कबीर दोहो के साथ भजन किए प्रस्तुत
शुभ न्यूज महोबा। संत कबीर अमृतवाणी सत्संग समिति के तत्वावधान में रविवार को कबीर आश्रम में सत्संग कार्यक्रम का आयोजन किया गया। सत्संग में वक्ताओं ने कबीरी दोहा को संगीत के साथ सुनाकर उनकी व्याख्या की साथ ही एतिहासिक चंद्रिका देवी के महत्व को बुंदेली भजन के माध्यम से लोगों को रूबरू कराया। इस मौके पर भजन भी प्रस्तुत किए गए, जिसे सुन श्रद्धालु मंत्रमुग्ध हो गए।
सत्संग की शुरूआत करते हुए समिति प्रमुख डॉ. एलसी अनुरागी ने कबीर का दोहा माया मरी न मन मारा, मर गए शरीर, आशा तृष्णा ना मरी, कह गए दास कबीर सुनाकर व्याख्या करते हुए कहा कि भौतिक वस्तुएं और संसार का मोह कभी समाप्त नहीं होता और चंचल मन भी अपनी इच्छाओं के साथ जीवित रहता है। शरीर जन्मता है और फिर मृत्यु को प्राप्त होता है, लेकिन माया और मन पर इसका कोई प्रभाव नहीं पड़ता। मनुष्य की उम्मीदें, लालसाएं, और इच्छाएं मृत्यु के बाद भी खत्म नहीं होतीं, इसलिए माया, मोह को भजन पूजन सत्संग देवी स्मरण से नियंत्रित किया जा सकता है। उन्होंने ऐतिहासिक चंद्रिका देवी का महत्व बताते हुए बुंदेली भजन जय हो मां चंद्रिका भवानी, तुम्हारी महिला काऊ ने न जानी प्रस्तुत किया।
पंडित जगदीश रिछारिया ने आया है सो जाएगा राजा रंक फकीर की व्याख्या करते हुए कहा कि जो इस संसार में आया है एक दिन उसे जाना ही होगा, इसलिए मृत्यु से पूर्व परमात्मा का स्मरण करते रहना चाहिए। पंडित हरिशंकर नायक ने कहा कि कबीर की आधी साखी साच बराबर तप नहीं, झूझ बराबर पाप में चारो बेदो का निचोड़ है। अधिवक्ता सुनीता ने कबीर के शोध परक विचार रखते हुए कहा कि दुनिया के 32 से अधिक देशों में कबीर के विचारो पर शोध हो रहे हैं। शिक्षक सुखराम स्नेही ने गंगा तेरा पानी अमृत झर झर बहता जाए भजन सुनाया। सत्संग दौरान ढोलक में शानदार प्रस्तुति रामदीन अनुरागी ने दी। इस मौके पर रामदयाल, उमादास आदि भक्त मौजूद रहे। अंत में समिति प्रमुख नेसभी कबीर भक्तों को प्रसाद वितरण किया।


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