टीकमगढ़। मध्यप्रदेश संस्कृति परिषद् के अंतर्गत साहित्य अकादमी, संस्कृति विभाग म.प्र. शासन द्वारा ‘बुंदेली गौरव गान’ कार्यक्रम श्रृंखला के अंतर्गत वरिष्ठ साहित्यकार लक्ष्मी प्रसाद मिस्त्री ‘रमा’ की स्मृति में व्याख्यान एवं भव्य कवि सम्मेलन का आयोजन रंग पंचमी के अवसर पर होटल अपूर्व, टीकमगढ़ में गरिमामय वातावरण में संपन्न हुआ। कार्यक्रम में साहित्यकारों, कवियों और साहित्य प्रेमियों की उल्लेखनीय उपस्थिति रही।
कार्यक्रम का शुभारंभ पारंपरिक रीति से दीप प्रज्ज्वलन और मां सरस्वती के पूजन के साथ हुआ। प्रथम सत्र में आयोजित व्याख्यान कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में भोपाल से पधारे साहित्य अकादमी के निदेशक डाॅ. विकास दवे ने अपने उद्बोधन में कहा कि साहित्य अकादमी प्रदेश के ग्रामीण अंचलों में जन्मे और समय के साथ विस्मृत होते जा रहे साहित्यकारों को पुनः पहचान दिलाने के उद्देश्य से उनके जीवन और कृतित्व पर केंद्रित आयोजन कर रही है। ऐसे कार्यक्रमों से नई पीढ़ी को अपने साहित्यिक गौरव और सांस्कृतिक विरासत से परिचित होने का अवसर मिलता है।
इस अवसर पर वक्ता के रूप में वरिष्ठ साहित्यकार एवं पूर्व प्राचार्य डाॅ. राजेन्द्र तिवारी तथा साहित्यकार डाॅ. लीना कुल्थिया ने लक्ष्मी प्रसाद मिस्त्री ‘रमा’ के साहित्यिक अवदान और उनके रचनात्मक व्यक्तित्व पर विस्तृत प्रकाश डाला। कार्यक्रम के अंत में स्थानीय संयोजक राजीव नामदेव ‘राना लिधौरी’ ने सभी अतिथियों एवं सहभागियों के प्रति आभार व्यक्त किया।
द्वितीय सत्र में आयोजित भव्य कवि सम्मेलन ने कार्यक्रम को और अधिक जीवंत बना दिया। कवि सम्मेलन का शुभारंभ गीतकार वीरेन्द्र चंसौरिया ने सरस्वती वंदना से किया—
“फूल चढ़ाकर दीप जलाते, ध्यान लगाकर मन में बसाते,
जय हो तुम्हारी संगीत विद्या ज्ञान की देवी…”
इसके बाद कवयित्री निशा तिवारी (भोपाल) ने श्रीराम की महिमा का वर्णन करते हुए भावपूर्ण कविता प्रस्तुत की, जिसे श्रोताओं ने खूब सराहा। कार्यक्रम संयोजक राजीव नामदेव ‘राना लिधौरी’ ने अपने प्रभावशाली मुक्तकों से वातावरण को सरस बना दिया—
“बेजुबां बेशक मैं नजर आता हूँ,
दुश्मनों में भी मगर दिल में उतर जाता हूँ…”
कवयित्री आकांक्षा बुंदेला (महरौनी) ने अपने संवेदनशील शब्दों से वर्तमान परिवेश की पीड़ा को स्वर दिया, वहीं महेन्द्र चौधरी (जतारा) ने ओजस्वी कविता के माध्यम से साहस और प्रतिकार का संदेश दिया।
मोहक नायक (पृथ्वीपुर) ने युवाओं को राष्ट्र रक्षा के लिए प्रेरित करते हुए अपनी कविता से जोश भर दिया, जबकि विशाल कड़ा (बड़ोराघाट) ने भारतीय संस्कृति और आदर्शों से ओतप्रोत रचना प्रस्तुत कर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।
इसके अतिरिक्त कवि धीरेन्द्र सिंह परिहार (बम्होरी कला) और पुष्पेन्द्र कुमार दुबे (सागर) ने भी शानदार काव्य पाठ कर श्रोताओं की खूब तालियाँ बटोरीं।
कवि सम्मेलन का प्रभावशाली संचालन एवं संयोजन राजीव नामदेव ‘राना लिधौरी’ द्वारा किया गया। पूरे आयोजन के दौरान साहित्य और संस्कृति का अनूठा संगम देखने को मिला, जिसने उपस्थित श्रोताओं को देर तक साहित्यिक रस में सराबोर किए रखा।
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