0 जिला नशा मुक्ति केंद्र के तत्वावधान में अभ्युदय कोचिंग में जागरूकता कार्यक्रम संपन्न
नशा मुक्ति केंद्र के चिकित्साधिकारी ने बताया कि
एक व्यक्ति नशे की गिरफ्त में आकर अपना शारीरिक और मानसिक संतुलन खो जाता है, जिससे उसे परेशान होना पडता है साथ ही उसके परिजनों को भी तमाम दिक्कतों का सामना करना पडता है। कहा कि नशीले पदार्थों के लंबे समय तक सेवन से मस्तिष्क की कार्यप्रणाली प्रभावित होती है, जिससे डिप्रेशन, चिंता, घबराहट ( और याददाश्त कमजोर होने जैसी समस्याएं होती हैं। कहा कि नशाखोरी कई तरह से खतरनाक हो सकती है। यह मन और शरीर को नुकसान पहुंचा सकती है, जिससे हेपेटाइटिस सी जैसी संक्रामक बीमारियां, दौरे पड़ना और यहां तक कि आत्महत्या के विचार जैसी स्वास्थ्य समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं। इसलिए ऐसे मरीजों को समय पर सही इलाज, सहायता और परामर्श प्राप्त करना महत्वपूर्ण है।
केंद्र की काउंसलर नीलू चतुर्वेदी ने कहा कि नशे की लत का प्रभाव केवल व्यक्ति के स्वास्थ्य तक सीमित नहीं रहता, बल्कि यह पूरे परिवार, बच्चों और समाज को एक गहरे संकट में धकेल देता है। घर में लगातार रहने वाले तनाव और कलह के कारण बच्चे असुरक्षा और डर की भावना के साथ बड़े होते हैं, जिससे उनका मानसिक विकास प्रभावित होता है। नशे की लत के कारण परिवार की आय का बड़ा हिस्सा नशे पर खर्च हो जाता है, जिससे बच्चों की शिक्षा, पोषण और बुनियादी जरूरतें पूरी नहीं हो पातीं। इस मौके पर केंद्र की टीम ने पंपलेट वितरण कर जनमानस को जागरूक किया साथ ही चिकित्साधिकारी मौजूद लोगों को नशे से दूर रहने की शपथ दिलाई। कार्यक्रम में टीएस की प्रोजेक्ट कोआर्डिनेटर अर्चना चतुर्वेदी , प्रोजेक्ट मैनेजर मधुकर सिंह, शिवानी, लव कुमार के अलावा कोचिंग संचालक शिवम साहू छात्र छात्राएं मौजूद रही।


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