राहुल जैन, बकस्वाहा संवाददाता । जिस सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में मरीजों को बीमारियों से निजात दिलाने और स्वस्थ रखने की जिम्मेदारी है, वहीं यदि मरीजों के पीने के पानी की टंकी से केंचुए और कीड़े निकलने लगें तो अस्पताल की व्यवस्थाओं पर सवाल उठना लाजिमी है। बकस्वाहा के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में सोमवार को ऐसा ही मामला सामने आया, जहां मरीजों और उनके परिजनों के लिए रखी पानी की टंकी में गंदगी के साथ केंचुए और कीड़े दिखाई दिए। मामला सामने आने के बाद अस्पताल प्रबंधन की व्यवस्थाओं को लेकर मरीजों में नाराजगी देखने को मिली।मरीज रामलाल रजक निवासी जुझारपुरा, अज्जू और श्याम रैकवार का कहना है कि अस्पताल में आने वाले लोग उपचार के साथ पीने के पानी के लिए भी अस्पताल की व्यवस्थाओं पर निर्भर रहते हैं। ऐसे में पानी की टंकियों की नियमित सफाई नहीं होना गंभीर लापरवाही का विषय है। आरोप है कि टंकी की लंबे समय से सफाई नहीं कराई गई, जिसके कारण उसमें गंदगी जमा हो गई और पानी में कीड़े पनपने की स्थिति बन गई।
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की पानी की टंकी से निकले केंचु और कीड़े, मरीजों में मचा हड़कंप
September 14, 2026
छत पर रखी टंकियों के हाल और भी बदतर, ढक्कन तक नहीं
अस्पताल परिसर में मरीजों के लिए रखी टंकी में कीड़े निकलने का मामला सामने आने के बाद जब अस्पताल की छत पर रखी पानी की टंकियों की स्थिति देखी गई तो वहां हालात और भी चिंताजनक नजर आए। छत पर रखी कई टंकियों पर ढक्कन तक नहीं होने की बात सामने आई। टंकियों के आसपास और अंदर गंदगी जमा होने से पानी की स्वच्छता पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
खुली टंकियों में धूल, कचरा और अन्य गंदगी आसानी से पहुंच सकती है। ऐसे में इन टंकियों से आने वाले पानी का इस्तेमाल करने वाले मरीजों और अस्पताल के कर्मचारियों के स्वास्थ्य को लेकर चिंता होना स्वाभाविक है। जिस पानी की स्वच्छता पर ही सवाल खड़े हो रहे हों, उसका लगातार इस्तेमाल लोगों को बीमारियों के खतरे में डाल सकता है।
विडंबना यह है कि अस्पताल में आने वाले मरीज पहले से ही बीमारी से परेशान होते हैं और यदि उन्हें अस्पताल में ही स्वच्छ पेयजल उपलब्ध नहीं हो तो स्वास्थ्य सेवाओं की व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े होना स्वाभाविक है।
मामला सामने आते ही टंकी पर चस्पा हुआ ‘पानी पीने योग्य नहीं’
पत्रकारों द्वारा जब पानी की टंकी का जायजा लिया गया और उसमें कीड़े दिखाई दिए तो इसकी जानकारी मरीजों को भी हुई। इसके बाद कई मरीजों ने टंकी का पानी पीने से इनकार कर दिया। मामला बढ़ता देख अस्पताल प्रबंधन द्वारा आनन-फानन में टंकी पर ‘यह पानी पीने योग्य नहीं है’ का पर्चा चस्पा कर दिया गया।
यह सवाल भी खड़ा हो गया कि यदि पानी पीने योग्य नहीं था तो मरीजों के लिए उसे पहले से चिह्नित क्यों नहीं किया गया और नियमित रूप से उसकी सफाई व निगरानी क्यों नहीं की जा रही थी?
कवरेज कर रहे पत्रकारों का वीडियो बनाने पर भी उठे सवाल
मामले की कवरेज के दौरान अस्पताल के कुछ कर्मचारियों द्वारा पत्रकारों का वीडियो बनाए जाने की बात भी सामने आई। इसी दौरान एक मरीज से पानी पीने के लिए कहे जाने को लेकर भी विवाद की स्थिति बनी। आरोप है कि अस्पताल की व्यवस्था पर सवाल उठने के बाद ध्यान मूल समस्या से हटाने का प्रयास किया गया।
हालांकि अस्पताल परिसर में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज से घटनाक्रम की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकती है। इससे यह भी पता लगाया जा सकता है कि मरीज सामान्य तौर पर इन टंकियों के पानी का उपयोग कर रहे थे या नहीं।
दस बजे से एक्स-रे के इंतजार में बैठे मरीज, दोपहर तक नहीं खुला कक्ष
अस्पताल की व्यवस्थाओं को लेकर एक और तस्वीर सामने आई। कुछ मरीज सुबह करीब दस बजे से एक्स-रे कराने के लिए इंतजार करते रहे, लेकिन दोपहर बारह बजे तक एक्स-रे कक्ष नहीं खुलने की बात सामने आई। इससे मरीजों और उनके परिजनों को परेशानी का सामना करना पड़ा।
वहीं, दोपहर बारह बजे तक बीएमओ के अस्पताल में मौजूद नहीं होने की बात भी सामने आई। हालांकि अस्पताल प्रबंधन ने इसे छुट्टी का दिन होने के कारण स्टाफ की अनुपस्थिति से जोड़कर बताया।
बीएमओ बोले—पांच टंकियां हैं, प्लंबर नहीं मिलने से हो रही परेशानी
इस मामले में बीएमओ डॉ. सत्यम आसाटी का कहना है कि अस्पताल में पीने के पानी के लिए पांच टंकियां रखी गई हैं। टंकी बदलने के लिए प्लंबर नहीं मिल पा रहा है। जैसे ही प्लंबर उपलब्ध होगा, पीने के पानी की टंकी बदलवाकर नई टंकी रखवाने का प्रयास किया जाएगा।
स्टाफ के समय पर नहीं आने के सवाल पर बीएमओ ने कहा कि आज छुट्टी का दिन है और अधिकतर स्टाफ अवकाश पर है। इसके बावजूद दोपहर दो बजे तक ओपीडी संचालित की जा रही है।
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